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Showing posts from October, 2025

“जहांगीर और नूरजहां: प्रेम और शक्ति की दास्तान”

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  भारतीय राजवंश में मुग़ल साम्राज्य का नाम सबसे समृद्ध और शक्तिशाली राजवंशों में आता है। मुग़ल साम्राज्य के इतिहास में एक नाम ऐसा भी आता है जो कला प्रेमी, कलाकार, संवेदनशील राजा हुवे जिनका नाम जहांगीर था। मुगलों के इतिहास में एक ऐसा एक ही राजा हुआ जिसके शासन में थोड़ा न्याय, कला और प्रेम के अनगिनत रंग समाए हुए हैं। जहांगीर का जन्म और परिवार जहांगीर का असली नाम नूर उद दीन मुहम्मद सलीम था। जहांगीर अकबर का बेटा था। जहांगीर का ही नाम सलीम था। जहांगीर चौथा मुगल सम्राट था। जो सिर्फ दारू पीने और भोग विलास करने के लिए जाना जाता है । जहांगीर का जन्म 31 अगस्त 1569 में हुआ था। जहांगीर की माता का नाम मरियम उज जमानी था।    अकबर ने अपने उतराधिकारी के लिए लम्बे समय तक प्रतीक्षा की बाद में जहांगीर का जन्म होता है । अकबर के लिए जहांगीर का जन्म होना एक आशीर्वाद जैसा था। अकबर ने जहांगीर को शिक्षा और युद्ध कला सीखने में कोई कमी नहीं छोड़ी उसने जहांगीर की परवरिश कोई कमी नहीं छोड़ी। जहांगीर को राजनीति और सभी विषयों में प्रशिक्षित किया गया। सिंहासन के लिए संघर्ष       जब सली...

“अकबर: इतिहास का महानायक या चालाक सम्राट

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 भारतीय इतिहास में कही सम्राट हुवे उन्हीं में से एक थे अकबर को कही लोग एक महान सम्राट मनाते है तो कुछ कायर भी कहते हैं। वह एक मुगल बादशाह ही नहीं बल्कि एक भारतीय इतिहास के विविधता में एकता का प्रतीक थे। अकबर का जन्म और प्रारंभिक जीवन अकबर का जन्म अमरकोट में 15 अक्टूबर 1542 हुआ था। अकबर का पहले नाम जलाल उदीन मोहम्मद था। अकबर का जन्म राणा वीर साल महल में हुआ था। अकबर के पिता का नाम हुमायूं था। अकबर की मां का नाम हमीदा बनू बेगम था। हुमायूं ने अकबर को अपना युवराज 1556 में घोषित किया था। अकबर का राज्याभिषेक 1556 में हुआ था।। जब अकबर का राज्याभिषेक हुआ तब उनकी आयु मात्र 13 साल के थे। प्रारंभिक शासनकाल और बेहरमखाँ  जब अकबर 13 वर्ष की आयु में गद्दी सम्भाली तब उनका पूरा राज्य अस्थिर था। अकबर ने अपने सेनापति बेहरम खान के साथ मिलकर राज्य की डोर संभाली बेहरम खान अकबर का गुरु भी था। अकबर ने युद्ध में लड़ना उन्हीं से सिखा था। बेहरम खान ही अकबर का मार्गदर्शन करते थे।1556 में पानीपत के युद्ध में हेमू को हराने में बेहरम खान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दूसरे पानीपत की लड़ाई जीत कर अकबर ने ...

अलाउद्दीन खिलजी: दिल्ली सल्तनत का महत्वाकांक्षी शासक

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 भारत मध्यकालीन इतिहास उनके महान योद्धाओ शासकों और वीरों की कहानियों से भरा पड़ा है। इन्हीं सब में एक है अलाउद्दीन खिलजी, जिन्हें दिल्ली सल्तनत का सबसे महत्वाकांक्षी और क्रूर और निर्दय, और शक्तिशाली राजा माना जाता है। उसने अपनी सेन्य शक्ति ही नहीं बल्कि प्रशासित और आर्थिक सुधार के जरिए दिल्ली सल्तनत की मजबूत नींव रखी। उसका नाम कही बार भारतीय इतिहास में विवादों में रहा पर उसका शासनकाल इतिहास में अलग पहचान रखता है। प्रारंभिक जीवन और सत्ता की प्राप्ति अलाउद्दीन खिलजी का जन्म 1266 में हुआ था। उसका असली नाम जूना मोहम्मद खिलजी था। अलाउद्दीन खिलजी के चाचा जलालुद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत के पहले खिलजी शासक थे। अलाउद्दीन खिलजी पहले अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी के अधीन काम करते थे कही बार उसने अपने चाचा को निष्ठा का प्रमाण दिया। लेकिन बाद में अलाउद्दीन खिलजी महत्वाकांक्षी स्वभाव के कारण उन्होंने अपने चाचा को गादी से हटाकर खुद राजा बनका सोचा और आगे चल कर सत्ता हासिल करने के लिए योजना बनाई। 1296 में अलाउद्दीन खिलजी राजा बनने के लिए योजना बनाई अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी को मारने के लिए योजना बनाई ...