“जहांगीर और नूरजहां: प्रेम और शक्ति की दास्तान”
भारतीय राजवंश में मुग़ल साम्राज्य का नाम सबसे समृद्ध और शक्तिशाली राजवंशों में आता है। मुग़ल साम्राज्य के इतिहास में एक नाम ऐसा भी आता है जो कला प्रेमी, कलाकार, संवेदनशील राजा हुवे जिनका नाम जहांगीर था। मुगलों के इतिहास में एक ऐसा एक ही राजा हुआ जिसके शासन में थोड़ा न्याय, कला और प्रेम के अनगिनत रंग समाए हुए हैं।
जहांगीर का जन्म और परिवार
जहांगीर का असली नाम नूर उद दीन मुहम्मद सलीम था।
जहांगीर अकबर का बेटा था। जहांगीर का ही नाम सलीम था।
जहांगीर चौथा मुगल सम्राट था। जो सिर्फ दारू पीने और भोग विलास करने के लिए जाना जाता है ।
जहांगीर का जन्म 31 अगस्त 1569 में हुआ था।
जहांगीर की माता का नाम मरियम उज जमानी था।
अकबर ने अपने उतराधिकारी के लिए लम्बे समय तक प्रतीक्षा की बाद में जहांगीर का जन्म होता है । अकबर के लिए जहांगीर का जन्म होना एक आशीर्वाद जैसा था। अकबर ने जहांगीर को शिक्षा और युद्ध कला सीखने में कोई कमी नहीं छोड़ी उसने जहांगीर की परवरिश कोई कमी नहीं छोड़ी। जहांगीर को राजनीति और सभी विषयों में प्रशिक्षित किया गया।
सिंहासन के लिए संघर्ष
जब सलीम बड़ा होने लगा और उसके और अकबर के बीच मतभेद होने लगे सलीम जल्द से जल्द सत्ता संभाल ना चाहता था और स्वतंत्र होना चाहता था। सलीम और अकबर दोनों को एक नाचने वाली अनारकली पसंद आ गई थी। दोनों उसके लिए लड़ने लगे थे।
1600 में सलीम ने विद्रोह कर दिया और अपने नाम के सिक्के चलाने लगा और अपना शासन बताने लगा और यह विद्रोह उसका असफल रहा। अकबर ने उसे माफ कर दिया। अकबर सलीम को कभी राजा नहीं बनाना चाहता था क्योंकि सलीम एक शराबी और अय्यास आदमी था।
1605 में अकबर की मौत हो जाती है और उसके बाद आगरा में सलीम जहांगीर नाम से सिंहासन पर बैठता है ।
जहांगीर की न्यायप्रियता : जंजीर-ए-अदल
जहांगीर अपने शासन काल में सबसे प्रसिद्ध न्याय परंपरा
“जंजीर-ए-अदल” (न्याय की जंजीर) से शुरू की।
यह एक सुनहरी जंजीर थी इसे लाल किले के सामने लगाई गई थी।
कोई व्यक्ति यदि दरबारी अफसरों से न्याय न पा सके तो वह व्यक्ति इस जंजीर को खींच कर सीधा सम्राट तक अपनी फरियाद पहुंचा सकता था।
यह एक प्रतीक था – राजा और प्रजा के बीच पारदर्शी न्याय का।
कई विदेशी यात्रियों ने अपनी पुस्तकों में इस व्यवस्था की प्रशंसा की है।
प्रशासन और राज्य व्यवस्था
जहांगीर का प्रशासन मुख्य रूप से अकबर की नीतियों पर आधारित था। उसने अकबर द्वारा स्थापित ‘मन्सबदारी प्रणाली’ और ‘राजस्व प्रणाली’ को जारी रखा, लेकिन उन्हें और भी सरल बनाया।
राजस्व नीति:
किसानों पर बोझ कम करने के लिए कुछ करों में छूट दी गई।
सैन्य नीति:
सेना का पुनर्गठन किया गया, जिससे सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ी।
विदेश नीति:
इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम ने सर थॉमस रो को जहांगीर के दरबार में भेजा।
जहांगीर ने उसे अनुमति दी कि अंग्रेज़ भारत में व्यापार कर सकें।
यही वह बिंदु था जिससे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में प्रवेश हुआ।
जहांगीर और नूरजहां की प्रेम कहानी
जहांगीर के जीवन का सबसे प्रसिद्ध और भावनात्मक अध्याय उसकी पत्नी नूरजहां से जुड़ा है।
नूरजहां का असली नाम था मेहरुन्निसा, जो ईरानी कुलीन मिर्ज़ा जीयब बेग की पुत्री थीं। वह अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और आत्मनिर्भर महिला थीं। पहले उनकी शादी शेर अफ़गान नामक अफसर से हुई थी, लेकिन शेर अफ़गान की मृत्यु के बाद जहांगीर ने 1611 ई. में उनसे विवाह किया।
जहांगीर ने उन्हें “नूरजहां बेगम” की उपाधि दी — जिसका अर्थ है “जहां की रोशनी”।
नूरजहां ने न केवल सम्राट का दिल जीता बल्कि दरबार की राजनीति में भी अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाई।
उनके पिता गियास बेग को “इतमाद-उद-दौला” की उपाधि दी गई और नूरजहां की भतीजी मुमताज़ महल (शाहजहां की पत्नी) बनीं — जो आगे चलकर ताजमहल की प्रेरणा बनीं।
नूरजहां के प्रभाव में जहांगीर कई स्थापत्य निर्माण करवाए — जैसे इतमाद-उद-दौला का मकबरा (आगरा) और शालीमार बाग (कश्मीर)।
जहांगीर का कला प्रेम
जहांगीर स्वयं चित्रकला का पारखी था। उसने चित्रकारों को प्राकृतिक चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया। उसके शासनकाल में मुगल पेंटिंग ने उच्चतम स्तर हासिल किया।
उस्ताद मंसूर, अबुल हसन, गोवर्धन, और बिशनदास जैसे महान कलाकार उसके दरबार में थे।
जहांगीर स्वयं चित्रों की समीक्षा करता और कलाकारों को पुरस्कृत करता था।
उसकी रुचि केवल चित्रकला तक सीमित नहीं थी —
वह स्थापत्य, संगीत, कविता, और प्राकृतिक विज्ञान में भी रुचि रखता था।
उसके शासनकाल में लाहौर, कश्मीर, और आगरा में कई सुंदर बाग़ और इमारतें बनीं।
तुज़ुक-ए-जहांगीर : आत्मकथा में झलकता सम्राट का मन
जहांगीर की आत्मकथा “तुज़ुक-ए-जहाँगीरी” (या जहांगीरनामा) मुगल काल के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक ग्रंथों में से एक है।
इस ग्रंथ में उसने अपने शासनकाल की घटनाओं, नीतियों, और निजी अनुभवों को बड़ी सच्चाई से लिखा है।
वह शराब की लत, प्रेम, युद्ध, कला – सब कुछ ईमानदारी से स्वीकार करता है।
इससे स्पष्ट होता है कि जहांगीर में आत्मचिंतन की अद्भुत क्षमता थी। वह दूसरों की आलोचना से नहीं डरता था, बल्कि अपनी कमजोरियों को भी स्वीकार करता था।
संघर्ष और विद्रोह
जहांगीर का शासन भले ही शांतिपूर्ण था, लेकिन पूरी तरह संघर्षमुक्त रहा।
उसके पुत्र खुसरो ने प्रारंभ में विद्रोह किया, जिसे पराजित कर कैद में रखा गया।
बाद में खुर्रम(शाहजहां) ने भी नूरजहां के प्रभाव के विरोध में बगावत की।
हालांकि अंततः उसने आत्मसमर्पण कर दिया।
राजनीतिक दृष्टि से नूरजहां और उसके भाई आसफ खान ने दरबार की नीतियों में बड़ी भूमिका निभाई।
जहांगीर और स्थापत्य कला
जहांगीर के शासनकाल में स्थापत्य कला का नया रूप विकसित हुआ —
जहांगीर के समय की इमारतों में सफेद संगमरमर, फूल-पत्तियों की नक्काशी और बागची की योजना पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रमुख स्थापत्य उदाहरण:
इतमाद-उद-दौला का मकबरा (आगरा)
जहांगीर का मकबरा (लाहौर)
शालीमार बाग़ (कश्मीर)
इनमें फारसी और भारतीय कला का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
प्रकृति और विज्ञान के प्रति लगाव
जहांगीर को प्रकृति और जीव-जंतुओं से अत्यंत प्रेम था।
उसने अपने “तुज़ुक” में 70 से अधिक पशु-पक्षियों की प्रजातियों का वर्णन किया है।
वह न केवल उन्हें देखता, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन भी करता था।
इस कारण कुछ इतिहासकार उसे “प्रकृति वैज्ञानिक सम्राट” भी कहते हैं।
जहांगीर की कमजोरिया
जहांगीर की सबसे बड़ी कमजोरी थी — शराब और अफीम का अत्यधिक सेवन।
यह उसकी सेहत को कमजोर करने लगा और शासन की बागडोर धीरे-धीरे नूरजहां और उसके परिवार के हाथों में चली गई।
कई बार दरबार में नूरजहां स्वयं निर्णय लेती थीं, जबकि जहांगीर या कश्मीर की वादियों में समय बिताता था।
जहांगीर की मृत्यु और समाधि
जहांगीर की मृत्यु 28 अक्टूबर 1627 को हुई।
वह कश्मीर से लौटते समय राजौरी के पास भीमबर में बीमार पड़ा और वहीं उसने अंतिम सांस ली।
उसके शव को लाहौर लाया गया और शाहदरा बाग़ में दफनाया गया।
यह मकबरा आज भी मुगल स्थापत्य कला का बेमिसाल उदाहरण है।
जहांगीर की विरासत
जहांगीर की विरासत भले ही अकबर और शाहजहां जितनी विशाल न रही हो,
लेकिन उसने भारत को न्याय, कला, और प्रेम की दृष्टि से अमूल्य उपहार दिए।
उसके शासन में —
न्याय को सर्वोच्च स्थान मिला
कला और स्थापत्य ने उन्नति की
धर्मनिरपेक्षता को महत्व दिया गया
नारी सशक्तिकरण का आदर्श नूरजहां के रूप में उभरा
जहांगीर ने अपने शासन को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा —
उसने उसे मानवीय संवेदनाओं और सौंदर्य दृष्टि से जोड़ा।
निष्कर्ष
जहांगीर का जीवन मुगल इतिहास की एक अनोखी कथा है —
जिसमें प्रेम है, राजनीति है, कला है और आत्मा की सच्चाई भी है।
वह न केवल एक राजा था, बल्कि एक इंसान भी था —
जो गलतियां करता था, सीखता था, और अपने दिल से शासन करता था।
जहांगीर की पहचान उस सुनहरी जंजीर से जुड़ी है जो न्याय का प्रतीक बनी,
और उस प्रेम से जो इतिहास में नूरजहां के नाम से अमर हो गया।

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