शाहजहाँ – प्रेम, सत्ता और स्थापत्य कला का सम्राट।ताजमहल के निर्माता शाहजहाँ – मुगल कला का स्वर्ण काल
भारतीय इतिहास में मुग़ल साम्राज्य का नाम सबसे पहले हमें अकबर के बेटे शाहजहाँ की याद आती हैं। और उनका नाम सुनते ही हमें सबसे पहले उनके द्वारा बनाए गए ताजमहल की याद आती है। ताजमहल एक एक खूबसूरत श्वेत सुंदरता, और प्रेम की कहानी है। उनको सम्राट कहा जाता है, लेकिन उनका जीवन सिर्फ प्रेम और महलों तक सीमित नहीं बल्कि, राजनीति, सत्ता संघर्ष, युद्ध, प्रशासन और विरासत के रंग भी उतने ही प्रबल थे।
प्रारंभिक जीवन
शाहजहाँ का नाम मीजी शाहबुद्दीन मुहम्मद खुर्रम था।
शाहजहाँ उनका उपनाम था।
शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी 1592 में लाहौर में हुआ था।
शाहजहाँ की मृत्यु 22 जनवरी 1666 में हुई थी।
शाहजहां की समाधि ताजमहल आगर में आई हुई है।
शाहजहाँ की पत्नी या मुमताज महल के अलावा 14 पत्नियां थी।
शाहजहाँ की संताने औरंगजेब के अलावा 14 बच्चे थे जो बाद में 7 जीवित रहते हैं।
शाहजहाँ के पिता जहांगीर थे। जो मुग़ल सम्राट थे।
शाहजहाँ की माता का नाम जगत गोसाई था।
शाहजहाँ मुग़ल वंश में से आता है।
मुमताज Mahal से प्रेम – जो इतिहास बन गया
शाहजहाँ के जीवन की सबसे सुंदर और चर्चित घटना है उनकी शादी अर्जुमंद बानो बेगम से, जिन्हें इतिहास में मुमताज़ महल के नाम से जाना जाता है। यह विवाह वर्ष 1612 में हुआ। दोनों के बीच का प्रेम अद्भुत था—मुमताज़, शाहजहाँ की प्रेरणा, उनकी साथी, उनकी सलाहकार और जीवन का सबसे अहम हिस्सा थीं।
मुमताज़ ने 14 संतानों को जन्म दिया, परंतु 1631 में प्रसव के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना शाहजहाँ के जीवन का सबसे बड़ा आघात थी। अपने प्रेम की निशानी के रूप में शाहजहाँ ने आगरा में ताजमहल का निर्माण कराया, जिसे ‘प्रेम का स्मारक’ कहा जाता है। ताजमहल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम है—संगमरमर में कैद एक अनंत प्रेम।
स्थापत्य कला का स्वर्णकाल
शाहजहाँ का शासन काल मुगल स्थापत्य कला का स्वर्णकाल माना जाता है। उनकी स्थापत्य दृष्टि उच्च स्तर की थी। ताजमहल ही नहीं, उन्होंने अनेक भव्य इमारतों और शहरों का निर्माण कराया—जिनमें लालकिला (दिल्ली का लाल किला), जामा मस्जिद, मोती मस्जिद, ताजमहल परिसर, शालीमार बाग़, पेशावर की मस्जिद, लाहौर का किला, और नई राजधानी शाहजहानाबाद प्रमुख हैं।
उनकी कला का मुख्य सार था—नज़ाकत, समरूपता, सफेद संगमरमर का अद्भुत प्रयोग और महीन नक्काशी। यदि अकबर के काल को धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता है, तो शाहजहाँ का युग कला और वास्तुकला की ऊंचाइयों के लिए।
शासन, विस्तार और युद्ध
शाहजहाँ ने 1628 से 1658 तक शासन किया। शासन में शक्ति और नियंत्रण बनाए रखने के लिए उन्होंने कई युद्ध लड़े। दक्षिण भारत, दक्कन, बलखा और कंधार तक मुगल साम्राज्य के विस्तार का श्रेय उन्हें जाता है।
उनके शासन में—
प्रशासन मजबूत हुआ
राजस्व व्यवस्था बेहतर हुई
व्यापार और कला का विकास हुआ
देश में सम्पन्नता बढ़ी
लेकिन दूसरी ओर—
बार-बार दक्कन अभियान ने आर्थिक बोझ बढ़ाया
युद्धों पर अधिक ध्यान देने से प्रशासन कुछ हद तक प्रभावित हुआ
उत्तराधिकारी संघर्ष और पतन
1657 में शाहजहाँ अस्वस्थ हुए, और यहीं से उनके पुत्रों के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। दारा शिकोह, शुजा, मुराद और औरंगज़ेब सिंहासन के लिए भिड़ गए। अंततः औरंगज़ेब ने सत्ता हथिया ली और शाहजहाँ को आगरा के किले में कैद कर दिया।
कहा जाता है कि शाह जहां अपनी अंतिम सांस उन खिड़कियों से ताजमहल को निहारते हुए गुजरते थे — वह स्मारक जो उन्होंने अपनी बेगम के लिए बनाया था, और जो अब उनके जीवन की आख़िरी रोशनी था।
1666 में शाहजहाँ की मृत्यु हुई और उन्हें मुमताज़ के बगल में ताजमहल के भीतर दफनाया गया — जहां आज भी उनके प्रेम की कहानी हवा में तैरती है।
क्यों याद किया जाता है शाहजहाँ को?
शाहजहाँ को इतिहास में उनकी वीरता, शासन क्षमता और स्थापत्य कला के अद्भुत योगदान के लिए याद किया जाता है। लेकिन सबसे अधिक वे ताजमहल के कारण अमर हैं। दुनिया उन्हें प्रेम का सम्राट कहती है, क्योंकि उन्होंने प्रेम को पत्थरों में ढालकर अनंत बना दिया।
निष्कर्ष
शाहजहाँ का जीवन उतार-चढ़ाव, प्रेम, सत्ता, युद्ध, कला और विरासत का संगम है। उन्होंने मुगल इतिहास को नई ऊंचाया दीं। यदि भारतीय इतिहास एक किताब है, तो उसमें शाहजहाँ का अध्याय सबसे खूबसूरत पन्नों में से एक है। ताजमहल उनकी आत्मा है और उनकी कहानी प्रेम, वफादारी और विरासत का अनंत प्रतीक।

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