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किस ने राजपूत अकबर की बेटी के साथ शादी की थी।

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 राणा अमरसिंह और अकबर की बेटी से विवाह: इतिहास, तथ्य और भ्रांतियाँ भारतीय इतिहास के पन्नों में राजपूतों और मुगलों के बीच रिश्तों को लेकर कई कहानियाँ दर्ज हैं। ये कहानियाँ कभी युद्ध की होती हैं, कभी संधियों की, और कभी वैवाहिक संबंधों की। ऐसी ही एक चर्चा अक्सर सुनने को मिलती है कि राणा अमरसिंह ने मुगल सम्राट अकबर की बेटी से विवाह किया था। इस लेख में हम इसी कथित विवाह की ऐतिहासिकता, सच्चाई, और जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों का विश्लेषण करेंगे। राणा अमरसिंह कौन थे? राणा अमरसिंह उदयपुर के मेवाड़ राज्य के राजा थे। वे राणा प्रताप के पुत्र और मेवाड़ वंश के एक सम्मानित शासक थे। राणा प्रताप के निधन के बाद 1597 ई. में अमरसिंह ने मेवाड़ की बागडोर संभाली। उनका शासनकाल मुगल सम्राट जहांगीर के समय था और यह समय राजपूत-मुगल संबंधों में बदलाव का काल भी था। क्या राणा अमरसिंह ने अकबर की बेटी से विवाह किया था? इतिहास में इस बात का कोई प्रमाणिक उल्लेख नहीं मिलता कि राणा अमरसिंह ने अकबर की किसी बेटी से विवाह किया हो। यह कथा लोककथाओं या आधुनिक अफवाहों पर आधारित हो सकती है, लेकिन किसी भी प्रमुख इतिहासकार, फ़...

कोन था महाराणा प्रताप का बेटा जिसे ने सारे युद्ध जीते थे। राणा अमरसिंह: वीरता और बुद्धिमत्ता का प्रतीक।

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  राणा अमरसिंह: वीरता और बुद्धिमत्ता का प्रतीक। भारतीय इतिहास में मेवाड़ की धरती सदा से शौर्य, त्याग और स्वतंत्रता की मिसाल रही है। जब भी हम मेवाड़ की बात करते हैं, तो महाराणा प्रताप का नाम गर्व से लिया जाता है। लेकिन उनके बाद जो उत्तराधिकार आया, वह भी कम प्रेरणादायक नहीं था। महाराणा प्रताप के वीर पुत्र राणा अमरसिंह प्रथम ने न केवल अपने पिता की विरासत को संभाला, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से यथार्थवादी कदम उठाकर मेवाड़ को स्थायित्व भी दिया। जन्म और पृष्ठभूमि राणा अमरसिंह का जन्म 16 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था। वे महाराणा प्रताप और उनकी प्रमुख रानी अजब्दे पुवार के पुत्र थे। उनका पालन-पोषण एक वीर क्षत्रिय की तरह हुआ। महाराणा प्रताप ने उन्हें बाल्यकाल से ही युद्ध कौशल, रणनीति, और राज्य संचालन की शिक्षा दी थी। अमरसिंह का बचपन राजसी विलास में नहीं, बल्कि संघर्ष और जंगलों में बीता। जब महाराणा प्रताप हल्दीघाटी युद्ध के बाद लगातार मुगलों से लोहा ले रहे थे, तब अमरसिंह ने अपने पिता के साथ हर संघर्ष को झेला। यही अनुभव आगे चलकर उनके चरित्र की मजबूती बना। महाराणा प्रताप का अंतिम आदेश। महा...

महाराणा सांगा के बारे मे यह सब आप ने नहीं जाना होगा?

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  महाराणा सांगा: मेवाड़ का वीर योद्धा महाराणा संग्राम सिंह, जिन्हें महाराणा सांगा के नाम से जाना जाता है, भारत के महानतम योद्धाओं में से एक थे। वे 16 वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक थे और अपनी बहादुरी, त्याग, और सैन्य कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने मुगलों, लोदियों, गुजरात और मालवा के सुलतानों विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किए और राजपूताना की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। प्रारंभिक जीवन और राजगद्दी महाराणा सांगा का जन्म 12 अप्रैल 1482 को मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश में हुआ था। वे महाराणा रायमल के पुत्र थे। महाराणा रायमल के तीन पुत्र थे—प्रताप सिंह, जयमल और संग्राम सिंह। जब सिंहासन का उत्तराधिकार विवाद हुआ, तो महाराणा सांगा को अपने भाइयों से संघर्ष करना पड़ा और अंततः वे मेवाड़ के शासक बने। वीरता और युद्ध महाराणा सांगा को उनकी युद्ध-कला और शौर्य के लिए जाना जाता है। उन्होंने 18 युद्ध लड़े और इनमें से अधिकांश में विजय प्राप्त की। वे अपनी वीरता के कारण कई बार गंभीर रूप से घायल हुए और उनके शरीर पर अनगिनत घाव थे। एक युद्ध में उनकी एक आँख चली गई, एक हाथ कट गया, और एक पैर भी बेकार ह...

Mahatama Gandhi: महात्मा गांधी के बारे मे ये आप नहीं जानते होंगे।

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 महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था। महात्म गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। पिता का नाम करमचंद गांधी था माता का नाम पुतली बाय था। महात्मा गांधी जी एक अच्छे खासे परिवार से आते थे महात्मा गांधी जी की शादी उनकी छोटी उम्र में ही हो गई थी उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था। गांधी जी अपनी बेरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड गए थे बेरिस्टर बनके बाद गांधी जी अपने पहले कुछ केस हार गए थे फिर गांधी जी ने एक स्कूल में पढ़ना शुरू किया यहां भी बच्चों ने बताया कि यह अच्छा नहीं पढ़ाते इसके बाद गांधी जी ने स्कूल छोड़ कर एक फैक्टरी की शुरुआत की पर यह फैक्टरी भी नहीं चली और इसे भी बंद करना पड़ा इसके बाद गांधी जी फिर से बैरिस्टरी का काम चालू किया गांधी जी अब्दुल भाई का मुकदमा लड़ने के लिए साउथ अफ्रीका जाते हैं। गांधी जी 1893 में साउथ अफ्रीका जाते हैं। एक दिन गांधी जी फर्स्ट क्लास में बैठे हुए थे पूरा डब्बा अग्रेजों से भरा हुआ था अंग्रेज ने देखा कि एक काला आदमी बैठा हुआ है यह देख कर गांधी को नीचे उतार देते है गांधी जी जब यह बात रेलवे स्टेशन में बताई की टिकिट होते हुवे भी उन्हें फर...

महाराणा प्रताप के पिता जिसने बनवाया था ये खूबसूरत शहर।

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  राणा उदय सिंह के पुत्र महाराणाप्रताप थे। राणा उदय सिंह द्वितीय थे।  राणा उदय सिंह ने उदयपुर की स्थापना की थी।  राणा उदय सिंह का जन्मदिन August 4,1522 थे। राणा उदय सिंह की मृत्यु February 28 1572 में हुई थीं। राणा उदय सिंह महाराणा सांगा के बटे थे रानी कर्णावती के बेटे जो बुंदी के महाराज की बेटी थी। 1536 में बनबीर जो राणा सांगा के भाई का बेटा था उसने विक्रमादित्य को मार दिया। बनवीर राणा उदय सिंहको मार ने गया पन्नाताय अपने बेटे चंदन को सुलाया और चंदन की जगह पे उद्देसिंह को सुलाया बनबीर ने चंदन को मार दिया पन्नाताई ने अपने बेटे का बलिदान दिया।  पन्नाताई आशा शाह देहापुरा के वहां जाती हैं कुंभलगढ़ में राणा उदयसिंह को सौप देती हैं में इनकी सुरक्षा नहीं कर पाऊंगी आप रखिए इन्हें मुझे मिलने की कोशिश मत करना वो बुंदी चली जाती हैं। महाराणा उदयसिंह की 15 पत्नियां थीं जिनके 25 बेटे थे। बलबीर सिंह के साथ लड़ाई होती है और बलबीर की हत्या कर दी जाती हैं। महाराणा उदयसिंह की पहली पत्नी जयवन्तबाय के पुत्र महाराणाप्रताप सिंह थे महाराणा उदयसिंह की दूसरी पत्नी सज्जाबाय सोलंकी के तीन बेटे ...

बप्पा रावल जीनोन पूरा अरब जीत लिया था। उनके नाम से पाकिस्तान में आज भी अक शहर है।

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  बप्पा रावल को दुश्मनों पर काल की तरह बरसने की बजसे उनको महाराजा कालभोज तरीके जाना जाता हैं। 727ई. सी 753ई.सी तक शासन किया। बप्पा रावल का जन्म 713 में हुआ था। बप्पा रावल की मृत्यु 753 में हुई थीं। बप्पा रावल के पिता इंडोर शासक इधर के शासक महिंद्रा द्वितीय थे। बप्पा रावल वास्तविक नाम जैकब पेटर था। बप्पा रावल के गुरु का नाम हरित ऋषि था। बप्पा रावल 728 में मेवाड़ की स्थापना की। बप्पा रावल ने जब चित्तौड़ गढ़ पर अपना अधिकार लिया तब उनकी उम्र बस 20साल की थी। बप्पा रावल की राजधानी चित्तौड़गढ़ रही। बप्पा रावल ने जब चित्तौड़गढ़ पर हमला किया तब चित्तौड़गढ़ पर मौर्य शासक मान मोरी राज था734 में बप्पा ने 20साल की आयु में मान मोरी को पराजित कर के चित्तौड़गढ़ पर अपना अधिकार किया  बप्पा रावल ने उदयपुर में एकलिंग जीका मंदिर निर्माण करवाया। मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया और सिंध में हिन्दू पर अत्याचार करना चालू किया हिन्दू को मारा गया मंदिर तोड दिए गये और सभी को मार दिया गया हिन्दू औरतो को अरब ले जाके बेचा गया ये बात जब बप्पा रावल को पता चली तो उन्होंने ये अत्याचार रोकने के लिए सेना ...

हिलाना (मास्टरबेशन) कैसे छोड़े?

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मास्टरबेशन मतलब हिलाना कैसे छोड़े।  हम सब हिलाते हैं। उसे छोड़ने के लिए हमे सबसे पहले हिलाने के बारे में ब्रह्मचारी बना पड़ेगा हिलाना हम एक दिन में नहीं छूट सकता हमारी बॉडी को हिलाने की आदत हो गई हैं। इसे हमे अपनी बॉडी में दिमाग में इसे डोपोमेन रिलीज होता है अगर हम हिलाना छोड़ देते है तो वह नहीं बनेगा जिसकी हमारे दिमाग को चाहिए इस लिए तुम जब हिलाना छोड़ो दोगे तब आप को नाइटफॉल यानी कि सपनदोस होगा आप गबरा के ब्रमाचारी पालन कर ते रहना एक दो बार नाइटफॉल होगा फिर नही होगा आपको जब हिलाने का मन करे तब आप कोई काम कर ने लग जावा jisaki वजसे आप का दिमाग को काम मिलजाएगा तो उसे डोपोमैन कि जरुरत नहीं पड़ेगी और आप हिलाने से बच जागोगे। ब्रमचारि का पालन करने के लिए क्या करना होगा? 1.आपको जिसे हिलानेके विचार आते है ऐसी चीजों को अपने से दुर रखो। 2. अपने फोन में ऐसे चीजे ना देखे जिसे आप के मन मे गंदे विचार आए आप फोन में ऐसे ऐप डिलीट करे या फिर वो सब ब्लू फिल्म ना देखे। 3. जब भी आप को हिलाने का मन करे तब आप अकेले ना रहे अपनी फैमिली या फ्रैंड के पास जाए या कोई ऐसी जगा पे जाए जहा पर लोग हो। 4. किसी लड़की...