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Showing posts from September, 2025

सयाजीराव गायकवाड़ : शिक्षा और समाज सुधार के महानायक।

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  भारत में कही ऐसे राजा इतिहास में हो गए जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए दूरदृष्टी की और समाज सुधारक नीतियों का जमके फैलाव किया। इन्हीं सब में एक नाम महाराज सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय है। महाराज सयाजीराव गायकवाड़ बडौदा रियासत (वर्तमान गुजरात का वडोदरा) के जो भारत देश में सभी राजा ओ में सबसे प्रगतिशील और आधुनिक सोच रखने वाले राजाओं में की जाती है।शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधारों में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। प्रारंभिक जीवन और राजगद्दी की ओर सफर बडौदा रियासत पर गायकवाड़ वंश का शासन था। उसी समय पर अग्रेजों ने 1875 में तत्कालीन महाराज मल्हराव को गादी से हटा दिया। उसके बाद गायकवाड़ परिवार में वारिश की तलाश शुरू हुई। तभी उनकी नजर एक साधारण परिवार के गोपालराव(जो बाद मे सयाजीराव गायकवाड़ कहलाए) की तरफ नजर पड़ी राजघराने और अग्रेजों की सहमति से बालक गोपालराव को गादी का उतराधिकारी घोषित किया गया।यूं तो वे एक साधारण परिवार से आए थे, लेकिन उनकी प्रतिभा, जिज्ञासा और सीखने की क्षमता अद्वितीय थी। शिक्षा-दीक्षा के बाद 1881 में मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने बड़ौद...

बुंदेलखंड के अमर वीर : उड़ा और ऊदल की शौर्यगाथा।

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भारत का इतिहास वीरता और बलिदानों से भरा पड़ा है। यहां जन्म लेने वाले हर कोई एक बहुत बड़ा योद्धा होता है। यहां की मिट्टी ही ऐसी है जो यहां पर जन्मा हर बच्चा अपने वतन के लिए मरना चाहते हैं। भारत में हर एक युग में ऐसे वीर योद्धा पैदा हुए हैं जिन्होंने प्राण देखकर अपनी मातृभूमि की रक्षा की है। भारत में राजस्थान, मेवाड़, मराठा भूमि या फिर बुंदेलखंड – हर क्षेत्र ने भारत को शूरवीरों की गौरवशाली गाथाएँ दी हैं। इन्हीं में से एक है महोबा (उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन नगर) के दो पराक्रमी भाई उड़ा और ऊदल, जिन्हें हम "आल्हा ऊदल"के नाम से भी जानते हैं।ये दोनों भाई बुंदेलखंड की आन-बान-शान माने जाते हैं। उनकी शौर्यगाथाएँ लोककथाओं, लोकगीतों और "आल्हा-खण्ड" जैसे ग्रंथों में अमर हैं। आल्हा और ऊदल के साहस की कहानियां आज भी गाँव-गाँव के चौपालों और मेलों में गाई जाती हैं। जन्म और परिवार उड़ा और ऊदल के पिताजी का नाम दसराज था वह अपने राज्य महोबा के राजा नरेश परमाल के सेनापति थे। उड़ा और ऊदल की माता का नाम देवलदेवी एक धर्मपरायण और साहसी महिला थी। बचपन से ही उड़ा और ऊदल युद्धकला में दक्ष हो गए...

"पन्ना धाय : पुत्र बलिदान से मेवाड़ और राणा उदयसिंह की रक्षा करने वाली वीरांगना"

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  जब भी मेवाड़ के लिए बलिदान की बात आएगी तब मातृभूमि की रक्षक भारत के इतिहास में एक एसी वीरांगना थी जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होता है पन्ना धाय। वो कोई रानी नहीं, राजकुमारी नहीं, की कोई सेनापति भी नहीं थी वो एक साधारण सी दासी थी। लेकिन उनका बलिदान इतना बड़ा था कि इतिहास के सबसे बड़े बलिदानों के श्रेणी में खड़ा कर दिया है। पन्ना धाय ने अपने बेटे का बलिदान दे कर मेवाड़ के वारिस को बचाया था। पन्ना धाय का परिचय पन्ना धाय मेवाड़ की रानी कर्णावती की एक विश्वसनीय दासी थी। उनका पूरा जीवन राज परिवार की सेवा में चला गया था। पन्ना धाय का एक बेटा था जिसका नाम चंदन था। चंदन राणा उदयसिंह की उम्र का ही था। पन्ना धाय ने अपने सुख दुःख से ऊपर मातृभूमि को रखा। मेवाड़ की राजनीतिक परिस्थिति जब मेवाड़ में राणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) के मरने के बाद मेवाड़ की गद्दी पर उनके बेटे विक्रमआदित्य बैठते है उनका सासन थोड़ा कमजोर होता है। और राज्य में उनके खिलाफ षड्यंत्रों होने लगे।    इस षड़यंत्रों में सबसे बड़ा नाम बनबीर का था। बनबीर ने सिंहासन पाने के लिए एक बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा। बनबीर ...

"राणा उदयसिंह: मेवाड़ के संघर्षशील राजा और महाराणा प्रताप के पिता"

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राजस्थान हमेशा वीरों की भूमि रही हैं। मेवाड़ एक एसी भूमि रही है जहां हमेशा वीरों को जन्म दिया है। मेवाड़ सदियों से शौर्य, बलिदान और त्याग की धरती रही है। यहां पर जन्मा हर राजा ने अपनी जान की बाजी लगाकर मातृभूमि की रक्षा की हर किसी ने एसी वीरता दिखाई और अपनी वीरता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया कि आज भी इतिहास के पन्ना में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया गया है। इस गौरवमयी परंपरा में एक बहुत बड़ा नाम राणा उदयसिंह द्वितीय का है। राणा उदयसिंह शिरोमणि महाराणा प्रताप के पिता थे। राणा उदयसिंह ने अपने जीवन काल में बहुत संघर्ष किया था।लेकिन उनका योगदान मेवाड़ के इतिहास को नई दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक जीवन और जन्म राणा उदयसिंह का जन्म 4 अगस्त 1522 में हुआ था। राणा उदयसिंह जी के पिता का नाम राणा सांगा था । राणा सांगा एक महान योद्धा थे। वो मेवाड़ का गौरव थे। अपने समय गुजरात के सुलतानों और दिल्ली के बादशाह को हराया था। राणा उदयसिंह जी की माता का नाम कर्णावती था।राणा उदयसिंह की माता रानी कर्णावती वही वीरांगना थीं जिन्होंने गुजरात के बहादुर शाह के आक्रमण के समय चित्तौड़ की स्त्रियों क...